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नई दिल्ली डेस्क: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार, 2 फरवरी को लोकसभा को बताया कि शहरी स्थानीय निकायों ने सड़क की धूल को कंट्रोल करने के लिए ₹7,094.39 करोड़ खर्च किया है. कुल 130 शहर NCAP (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) के दायरे में आते हैं, जिनमें से 48 मिलियन-प्लस शहरों को 15वें वित्त आयोग के ‘मिलियन प्लस सिटीज चैलेंज फंड’ से फंडिंग मिलती है. इसके अलावा बचे 82 शहरों को MOEFCC की प्रदूषण नियंत्रण योजना से फंडिंग मिली है. केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित जवाब में संसद में बताया कि अब तक NCAP (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) के तहत कुल ₹13,852.22 करोड़ जारी किए गए हैं, जिसमें से सड़क की धूल के मैनेजमेंट पर सबसे बड़ा हिस्सा खर्च हुआ है. केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी शिवसेना सांसदों एकनाथ शिंदे और रविंद्र वायकर के तीन सवालों के जवाब में दी.
क्या सवाल पूछे गए थे?
- सड़क पर धूल के प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए मंजूर और बांटे गए फंड के बारे में पूरी जानकारी.
- क्या मशीनों से सफाई और पानी छिड़कने के उपायों को लागू करने के बाद सड़क पर धूल के लेवल में कोई प्रतिशत कमी आई है?
- अगर इस तकनीक से सड़क की धूल में कमी आई है, तो उसकी डिटेल्स और व्यस्त सड़कों और ज़्यादा कंस्ट्रक्शन वाले इलाकों, खासकर मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पुणे जिलों में धूल को दोबारा उड़ने से रोकने के लिए इस्तेमाल की गई नई टेक्नोलॉजी या मटीरियल की डिटेल्स दी जाए.
जवाब में कहा गया है कि NCAP के तहत शहरों में किए गए सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडीज़ के नतीजों से पता चला है कि सड़क की धूल प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान देती है और PM10 कंसंट्रेशन में 20-60% हिस्सा इसी का होता है. इसी वजह से सिटी एक्शन प्लान में मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और कंस्ट्रक्शन कंट्रोल पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया. मंत्री के द्वारा जवाब में इस बात का जिक्र भी किया गया है कि NCAP के तहत किए गए ‘सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी’ से यह पता चला है कि शहरी इलाकों में हवा को जहरीली बनाने में सड़क की धूल बड़ी भूमिका निभाती है. यह PM10 (पार्टिकुलेट मैटर) कंसंट्रेशन में 20% से 60% तक हिस्सा रखती है. इसी को देखते हुए ‘सिटी एक्शन प्लान’ में सड़क की सफाई के लिए मशीनों के उपयोग, पानी के छिड़काव और निर्माण गतिविधियों पर कंट्रोल जैसे उपायों पर जोर दिया गया है.
सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017-18 के मुकाबले 2024-25 में 103 शहरों में PM10 के स्तर में सुधार हुआ है. कुल 22 शहरों ने तो राष्ट्रीय मानक (NAAQS) को भी पूरा कर लिया है, जहां PM10 की सांद्रता 60 µg/m3 (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से कम पाई गई है. मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पुणे जैसे व्यस्त निर्माण वाले इलाकों में धूल को उड़ने से रोकने के लिए नई टेक्नोलॉजी और मैटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है. 10 जनवरी 2019 को तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) लॉन्च किया था. इस प्रोग्राम का मकसद वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और कमी के लिए ज़रूरी कदम उठाना है.
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत लागू किए गए सिटी एक्शन प्लान में सड़क की धूल कंट्रोल, कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन एक्टिविटीज़, खुले में कचरा जलाना, गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण और इंडस्ट्रियल प्रदूषण शामिल हैं. NCAP के तहत 130 शहरों द्वारा किए गए फोकस्ड एक्शन के पॉजिटिव नतीजे दिखे हैं, जिसमें 103 शहरों में 2017-18 की तुलना में 2024-25 में PM10 कंसंट्रेशन में कमी आई है. संसद में शिवसेना सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने बताया कि अब तक ₹13,852 करोड़ की गैप फंडिंग जारी की जा चुकी है. हालांकि, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के एक पिछले आकलन में बताया गया था कि सड़क की धूल पर फोकस ज्यादा है, जबकि प्रदूषण के अन्य स्रोतों (कंबशन सोर्स) के लिए फंडिंग कम थी. इसके बावजूद, सड़क की धूल कम करने की रणनीति ने कई प्रदूषित शहरों को ‘साफ हवा’ के टार्गेट के करीब पहुंचा दिया है.