सफाई कर्मी के ट्रांसफर ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पारा बढ़ाया

Fourth Pillar Live

यूपी डेस्क : सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ छावनी परिषद द्वारा सफाई कर्मी उमेश कुमार के ट्रांसफर को भाजपा सरकार की दमनकारी राजनीति करार दिया है. दरअसल, 14 अप्रैल को बाबासाहेब अंबेडकर जयंती पर उमेश की बेटी अंजलि मैसी ने अखिलेश यादव को भंडारे का प्रसाद खिलाया था, जिसके बाद कर्मचारी को सुरक्षा निगरानी के काम से हटाकर दोबारा सफाई कार्य में लगा दिया गया. छावनी परिषद प्रशासन ने इस कार्रवाई को नियमों के उल्लंघन और पूर्व शिकायतों का परिणाम बताया है. उमेश कुमार ने पूर्व में भंडारे के लिए रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को आमंत्रित करने हेतु पत्र भेजा था. प्रशासन के अनुसार, उच्चाधिकारियों को सीधे पत्र लिखना सेवा आचरण नियमावली के विरुद्ध है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज की एक महिला के पिता को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अंबेडकर जयंती पर वहां पूड़ी खाई थी. अखिलेश ने इसे अंग्रेजों से भी बदतर राजनीति बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से पीडीए विरोधी रही है.

उन्होंने पुराने वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी उनके साथ चाय पीने की वजह से एक युवा को निशाना बनाया गया था. कर्मचारी उमेश कुमार का आरोप है कि उनकी बेटी द्वारा अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाने का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है. अक्टूबर 2023 में उन्हें प्रतिष्ठानों की सुरक्षा निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे अब छीन लिया गया है. दूसरी ओर, छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिषेक राठौर ने स्पष्ट किया कि उमेश मूल रूप से सफाई कर्मी ही हैं और यह केवल एक सामान्य स्थानांतरण है. उनके मुताबिक, उमेश के खिलाफ पहले से भी कई शिकायतें और चेतावनियां लंबित थीं. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का आधार राजनीतिक नहीं बल्कि अनुशासनहीनता है. उमेश कुमार ने कार्यक्रम की अनुमति और आमंत्रण के लिए प्रधान निदेशक रक्षा संपदा और अन्य सैन्य अधिकारियों को सीधे पत्र लिखे थे, जो उनके पद के प्रोटोकॉल के खिलाफ है. वहीं, उमेश का कहना है कि उन्होंने विधिवत सूचना और अनुमति के लिए पत्र भेजे थे. फिलहाल, इस ट्रांसफर ने लखनऊ में एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है, जिसमें एक तरफ सेवा नियम हैं तो दूसरी तरफ सियासी आरोपों की झड़ी है.

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