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नई दिल्ली डेस्क: दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए अपनी नई EV पॉलिसी लाने की तैयारी में है. सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जनवरी के पहले हफ्ते तक दिल्ली की नई EV पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी हो सकता है. इस पॉलिसी का सबसे बड़ा फोकस मिडिल क्लास और रोज़मर्रा के वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों पर रहेगा, ताकि पेट्रोल-डीजल से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट को आसान बनाया जा सके. नई EV पॉलिसी में दोपहिया वाहनों पर 35 से 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी देने का प्रस्ताव हो सकता है. इससे नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और डिलीवरी से जुड़े युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति ₹1.10 लाख की इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदता है और उसे ₹40 हजार की सब्सिडी मिलती है, तो उसकी वास्तविक लागत करीब ₹70 हजार रह जाएगी. इससे EV स्कूटी पेट्रोल स्कूटी के मुकाबले सस्ती पड़ सकती है. इससे जुड़े एक और उदाहरण के जरिए हम आपको समझाएं कि अगर आप नई इलेक्ट्रिक स्कूटी 1.10 लाख रुपए की खरीदनते हैं और आपकी पुरानी पेट्रोल स्कूटी की कीमत अगर 85 हजार रुपए है तो सरकार आपको ₹35000 की सब्सिडी दे सकती है. सरकार कमर्शियल वाहनों को भी EV में बदलने पर जोर दे रही है. नई पॉलिसी में ऑटो और ई-रिक्शा जैसे श्री-व्हीलर को पेट्रोल या CNG से इलेक्ट्रिक में शिफ्ट करने पर भारी सब्सिडी देने की तैयारी है.
यदि कोई ऑटो चालक डीजल ऑटो को इलेक्ट्रिक ऑटो में बदलता है, तो उसको भी लगभग 40 से 50% की सब्सिडी मिल सकती है इसके साथ ही ऑटो चालक उस सब्सिडी के साथ-साथ ईंधन खर्च में हर महीने हजारों रुपये की बचत हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, 20 लाख रुपये तक की पेट्रोल या डीजल कार रखने वाले लोग अगर इलेक्ट्रिक कार में शिफ्ट करते हैं, तो उन्हें भी सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाएगी. हालांकि यह सब्सिडी दोपहिया वाहन और कमर्शियल तीन पहिया वाहन के मुकाबले कम होगी हो सकती है सरकार इसके लिए कैपिंग भी लगा सकती है. इसका उद्देश्य यह है कि सिर्फ दो पहिया ही नहीं, बल्कि निजी कार मालिक भी EV अपनाने के लिए प्रेरित हों. सरकार का मानना है कि नई EV पॉलिसी से एक ओर जहां दिल्ली में वायु प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी ओर आम लोगों का पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च भी घटेगा. इलेक्ट्रिक वाहनों का रनिंग कॉस्ट कम होने से लंबे समय में लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी. हालांकि अभी यह पॉलिसी ड्राफ्ट चरण में है, लेकिन जनवरी के पहले सप्ताह में इसके सार्वजनिक होने की उम्मीद है. इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जा सकता है. दिल्ली सरकार की यह पहल राजधानी को EV हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.