इस्तीफा देने वाले प्रशांत सिंह और अलंकार अग्निहोत्री की आपस में बहस बनी चर्चा

Fourth Pillar Live

यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय खलबली मच गई जब दो दिनों में दो वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. जहां बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार की नीतियों, विशेषकर नए यूजीसी नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए बगावती तेवर अपना लिए हैं तो वहीं अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हुए पद त्यागा. इस बीच दोनों अधिकारियों ने बातचीत में अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने को लेकर विस्तार से चर्चा की. लाइव कार्यक्रम में मामला तब गरमा गया जब दोनों अधिकारी आमने-सामने आ गए. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अग्निहोत्री का दावा है कि 26 जनवरी 2026 की शाम कलेक्ट्रेट कार्यालय में उनके खिलाफ जातिगत दुर्भावना से प्रेरित टिप्पणी की गई.

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे को सरकार की नीतियों के खिलाफ अंतरात्मा की आवाज बताया. उन्होंने नए यूजीसी नियमों को ‘काला कानून’ करार देते हुए आरोप लगाया कि ये सामान्य वर्ग और छात्रों के खिलाफ हैं. साथ ही उन्होंने प्रयागराज के माघ मेले के दौरान साधु-संतों के साथ कथित दुर्व्यवहार और जातिगत टिप्पणी के मुद्दे पर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए. अग्निहोत्री ने यहां तक कहा कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था विफल हो चुकी है और राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए. इसके जवाब में प्रशांत कुमार सिंह ने कड़ा विरोध जताया. उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा सरकार और संविधान के समर्थन में है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत. सिंह ने स्पष्ट किया कि एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते वे निर्वाचित नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों पर चुप नहीं रह सकते थे.

लाइव डिबेट के दौरान माहौल तब और गर्म हो गया जब सिंह ने अग्निहोत्री के कदम को भावुक और मर्यादा के खिलाफ बताया. जब पूछा गया कि अलंकार अग्निहोत्री के कदम से सहमत हैं तो प्रशांत सिंह ने कहा कि मैं इस कदम से इसलिए नहीं सहमत हूं क्योंकि अंलकार उन्होंने (अग्निहोत्री) भावुकता में ये कदम उठा लिया है. क्योंकि सरकार ने विरोध में ऐसा कोई काम नहीं किया है. आप यूपी सरकार के कर्मचारी थे. मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री संवैधानिक पदों पर हैं और आपको असहमति को मर्यादित ढंग से व्यक्त करनी चाहिए थी. इस पर पलटवार करते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, “आपने क्या भावुक होकर दिया है या कोई सपना आया था. आप चुप रहिए, हमारे बारे में मत बोलिए. ना मैं आपके बारे में कुछ बोलना चाहता हूं. ये आपका व्यक्तिगत विचार है. मुझे इस पर कोई कमेंट नहीं करना है. हम अपने समाज की बात कर रहे हैं. ये बात हमारे समाज के सांसद-विधायकों को करनी चाहिए लेकिन जब कोई इस पर कुछ नहीं बोल रहा है तो किसी ना किसी को बोलना पड़ेगा. सिस्टम में रहकर या बाहर होकर हम अपना काम करेंगे.”

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