केंद्रीय बजट 2026: जाने जनता के लिहाज़ से क्या सस्ता और क्या महंगा हुआ?

Fourth Pillar Live

नई दिल्ली डेस्क: इस केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने एक तरफ़ मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और ग्रीन एनर्जी को राहत दी है, तो दूसरी तरफ शेयर बाज़ार से जुड़े निवेश और कुछ गतिविधियों को महंगा किया है. सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी है जिससे भारतीय बाज़ार में ये दवाएं सस्ती हो जाएंगी. इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से मंगवाई जाने वाली दवाओं पर भी सरकार ने ड्यूटी हटा दी है. यही नहीं, सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी उत्पादन से जुड़े कुछ उपकरणों पर भी ड्यूटी कम की है. इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं, मरीजों, निवेशकों और उद्योगों पर पड़ेगा.

केंद्रीय बजट 2026-27 में क्या हुआ सस्ता:-

17 लाइफ़-सेविंग दवाएं, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल, लेदर, सिंथेटिक जूते, टेक्सटाइल, विदेश यात्रा के टूर पैकेज, निजी इस्तेमाल के लिए विदेश से मंगाया जाने वाला सामान, विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर लगने वाला कर

केंद्रीय बजट 2026-27 में क्या हुआ महंगा:-

फ़्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग, पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड समेत कई मिनरल्स, स्क्रैप, शराब, तेंदू पत्ता बजट में हालांकि, टैक्स को लेकर कोई रियायत नहीं दी गई है और न ही बड़ा ऐलान किया गया है. सरकार ने दावा किया है कि यह बजट विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की तरफ बढ़ने में काफी अहम साबित होगा. भारत अमेरिका की तरफ़ से लगाए गए 50 फ़ीसदी टैरिफ़ का सामना कर रहा है और साथ ही वैश्विक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. इसे देखते हुए इस बजट पर लोगों की ख़ास निगाह थी. केंद्र सरकार ने इस बजट के ज़रिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों और उनके परिवारों पर इलाज के ख़र्च के बोझ को कुछ कम करने की कोशिश की है. बजट में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 लाइफ-सेविंग दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है. इसके अलावा 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आयातित दवाओं और स्पेशल फूड पर भी टैक्स नहीं लगेगा.

माइक्रोवेव ओवन के कुछ जरूरी पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है. सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट की सीमा 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है. लेदर, सिंथेटिक जूते और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में भी ड्यूटी-फ्री इनपुट और समयसीमा को बढ़ाया गया है. इससे इनके सस्ते होने की संभावना है. न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए आयात होने वाले उपकरणों पर 2035 तक कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी. सरकार ने बिजली से चलने वाली गाड़ियों, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी उत्पादन पर भी टैक्स कम करने का प्रयास किया है. लिथियम-आयन बैटरी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कई इनपुट्स को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है. सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाले सोलर ग्लास के कच्चे माल सोडियम एंटीमोनेट पर भी ड्यूटी हटा दी गई है. इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर एनर्जी और बैटरी सेक्टर में उत्पादन लागत घट सकती है. हालांकि ये फ़ायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा या नहीं, ये कंपनियों की नीतियां निर्धारित करेंगी. दरअसल, इन बदलावों से उत्पादन लागत तो घटेगी लेकिन ग्राहक मूल्य घटेगा या नहीं, ये फ़ैसला कंपनियां लेंगी.

निजी इस्तेमाल के लिए विदेश से मंगाए जाने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी 20% से घटाकर 10% कर दी गई है. यानी विदेश से मंगवाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स या गिफ्ट आइटम अब पहले से सस्ते पड़ सकते हैं. विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) को 5% या 20% से घटाकर फ्लैट 2% कर दिया गया है, वह भी बिना किसी लिमिट के. इसी तरह विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर 10 लाख रुपये से ज्यादा की रकम पर टीसीएस अब 5% की जगह 2% लगेगा. इससे घूमने के लिए या पढ़ने के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों को कुछ राहत मिल सकती है. शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करना पहले से कुछ महंगा हो जाएगा. सरकार ने फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है. ऑप्शंस प्रीमियम पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) 0.1% से 0.15% और ऑप्शन एक्सरसाइज़ पर 0.125% से 0.15% कर दिया गया है. इससे फ़्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग करना महंगा होगा. कंपनियों के शेयर बायबैक पर प्रमोटर्स के लिए टैक्स स्ट्रक्चर सख़्त किया गया है. अब प्रमोटर्स को कैपिटल गेन टैक्स के साथ

अतिरिक्त टैक्स भी देना होगा, जिससे बायबैक के ज़रिए मुनाफ़ा निकालना कम आकर्षक हो सकता है. कुछ केमिकल्स जैसे पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड और कुछ उपभोक्ता सामानों पर पहले मिलने वाली कस्टम ड्यूटी छूट ख़त्म कर दी गई है. इन पर अब 7.5% तक बेसिक कस्टम ड्यूटी लगेगी, जिससे इनका लैंडेड कॉस्ट बढ़ेगा. रसायनों के महंगे होने का असर इनसे बनने वाले उत्पादों की क़ीमतों पर पड़ सकता है. यानी कुल मिलाकर बजट 2026 में मिनरल्स, स्क्रैप, शराब महंगे हुए हैं. जबकि लेदर, कपड़ा, सिंथेटिक फुटवियर, विदेशी यात्रा, कैंसर की 17 दवाएं, माइक्रोवेव ओवन, एयरक्राफ्ट निर्माण से जुड़ी चीजें, EV बैटरी, शुगर की दवाएं वगैरह सस्ते होने की उम्मीद है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के विश्लेषण से साफ है कि इस बार सरकार ने उत्पादन और उपभोग को सस्ता करने के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन को महंगा करने का रास्ता चुना है. बजट के बाद महंगे होने वाले उत्पादों/गतिविधियों में शेयर बाजार का फ्यूचर्स-ऑप्शंस कारोबार शामिल है, क्योंकि प्रतिभूति लेनदेन कर को बढ़ाया गया है, वहीं शराब, स्क्रैप, खनिज और तेंदूपत्ता की बिक्री पर स्रोत पर कर संग्रह बढ़ने से इन क्षेत्रों में लागत ऊपर जा सकती है. aबजट के बाद इलाज के खर्च में कमी, विदेश यात्रा व शिक्षा पर कम टैक्स, और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक व ऊर्जा-संबंधित उत्पादों के सस्ते होने की संभावना है.

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