नौकरी से इस्तीफ़ा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य से लिया आशीर्वाद

Fourth Pillar Live

यूपी डेस्क: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर खड़ा दिख रहा है. इस्तीफे के बाद निलंबन, नोटिस और केंद्र सरकार पर तीखे हमलों के बीच अलंकार अग्निहोत्री ने अब आध्यात्मिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर अपनी रणनीति साफ करनी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में पहले उन्होंने काशी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया और इसके बाद प्रयागराज पहुंचकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर वकीलों से मुलाकात की. सोमवार को प्रयागराज पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि उनका यह दौरा पूरी तरह से कानूनी सलाह से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि इस्तीफे के बाद उन्हें निलंबन को लेकर जो नोटिस जारी किया गया है, उस पर उनकी लीगल टीम गहन अध्ययन कर रही है. सभी कानूनी पहलुओं को समझने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा. हालांकि उनके शब्दों से यह संकेत भी साफ झलका कि वह निलंबन को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने से पीछे नहीं हटेंगे. अलंकार ने कहा, मैं कोई भावनात्मक या जल्दबाजी का फैसला नहीं करना चाहता. कानून की भाषा में लड़ाई लड़ी जाएगी. नोटिस का अध्ययन हो रहा है, उसके बाद जो भी संवैधानिक रास्ता होगा, उसे अपनाया जाएगा.

प्रयागराज पहुंचने से पहले अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी गए थे, जहां उन्होंने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया. यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे उनके आंदोलन के वैचारिक और नैतिक आधार से जोड़कर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि 13 जनवरी को यूजीसी द्वारा जारी नए बिल और प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य को पालकी सहित संगम तट पर स्नान से रोके जाने की घटना के विरोध में ही अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दिया था. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि उनकी आत्मा की आवाज थी. अलंकार अग्निहोत्री का सबसे आक्रामक रुख एससी-एसटी एक्ट को लेकर सामने आया है. उन्होंने एक बार फिर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग के लिए पूरी तरह से काला कानून बन चुका है. उनका दावा है कि इस कानून का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे समाज में विभाजन और असंतोष बढ़ रहा है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, मैं किसी वर्ग के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन किसी कानून का दुरुपयोग अगर लगातार हो रहा है तो उस पर सवाल उठाना जरूरी है. एससी-एसटी एक्ट अपने मौजूदा स्वरूप में संतुलन खो चुका है.

अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार से 6 फरवरी तक संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, ताकि एससी-एसटी कानून पर खुलकर चर्चा हो सके. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार 6 फरवरी तक विशेष सत्र नहीं बुलाती है तो 7 फरवरी से वह दिल्ली कूच करेंगे. उनका दावा है कि इस आंदोलन में देशभर से विभिन्न संगठनों के लोग शामिल होंगे और यह सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक मुद्दे का रूप लेगी. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन पूरी ताकत और एकजुटता के साथ किया जाएगा. अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे को लेकर किसी भी तरह के कयासों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे. उन्होंने कहा कि उन्होंने सोच-समझकर और आत्ममंथन के बाद यह फैसला लिया है. यह कोई क्षणिक आवेश में लिया गया निर्णय नहीं था. जब एक बार मैंने अपने पद से हटने का फैसला कर लिया, तो अब पीछे मुड़ने का सवाल ही नहीं उठता. अलंकार अग्निहोत्री का सबसे आक्रामक रुख केंद्र की मोदी सरकार को लेकर रहा है. उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार का कामकाज उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी की याद दिलाता है. उनका आरोप है कि सरकार आम जनता की आवाज को अनसुना कर रही है और चुनिंदा वर्गों के हित में फैसले ले रही है.

उन्होंने कहा, जिस तरह अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी देश के संसाधनों और व्यवस्था को अपने हिसाब से चलाती थी, कुछ वैसा ही माहौल आज दिखाई देता है. जहां एक ओर अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर उनका रुख अपेक्षाकृत नरम नजर आया. उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के बाद जो हालात बने, उसमें कोई भी प्रशासनिक अधिकारी होता तो वही करता. अलंकार ने स्पष्ट किया कि वह सीएम योगी के खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं करना चाहते. उनका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर कई बार फैसले परिस्थितियों के दबाव में लेने पड़ते हैं. हालांकि अलंकार अग्निहोत्री ने खुद को सिर्फ एक वर्ग का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने सवर्ण नेताओं पर जरूर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के नेताओं को भी अपनी आत्मा की आवाज सुननी चाहिए और यूजीसी बिल व एससी-एसटी कानून जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए. उनका कहना है कि चुप्पी साध लेना समाधान नहीं है, बल्कि इससे समस्याएं और गहरी होती जाती हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अलंकार अग्निहोत्री आने वाले समय में किसी राजनीतिक दल का दामन थाम सकते हैं. हालांकि उन्होंने फिलहाल ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है. उन्होंने कहा, सिटी मजिस्ट्रेट और प्रोटोकॉल अफसर के तौर पर सभी राजनीतिक दलों के लोग मेरे संपर्क में थे. किसान यूनियन समेत कई संगठन भी संपर्क में हैं, लेकिन मैं अभी किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हो रहा हूं. उनका साफ कहना है कि उनकी प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि एससी-एसटी कानून को लेकर चलाया जाने वाला आंदोलन है.

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