UP में वर्क फ्रॉम होम की नई पॉलिसी, तय हुआ काम करने का मानक

Fourth Pillar Live

यूपी डेस्क : यूपी में अब सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. योगी सरकार ने बिजली बचाने और खर्च कम करने को नई दिशा देते हुए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि अब सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर (AC) का तापमान एक निश्चित सीमा में ही रखा जाएगा. इसके साथ ही लिफ्ट के उपयोग, यात्रा व्यवस्था और कार्यशैली में भी व्यापक सुधार लागू किए जाएंगे. इसके अलावा 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था अपनाने पर भी बल दिया है. यह निर्णय सीएम योगी ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंत्रियों के साथ आयोजित पहली बैठक में लिया. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सबसे पहले सचिवालय और निदेशालय स्तर पर सभी कार्यालयों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रखा जाए. इसका उद्देश्य बिजली की अनावश्यक खपत को रोकना और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना है. सरकारी कार्यालयों में लंबे समय से AC के अत्यधिक उपयोग को लेकर सवाल उठते रहे हैं. अब इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यावरणीय संतुलन को भी लाभ मिलेगा. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकारी कार्यालयों में लिफ्ट और अन्य संसाधनों का उपयोग केवल आवश्यकता के आधार पर किया जाए. नई कार्यसंस्कृति के तहत मुख्यमंत्री ने 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था अपनाने पर भी बल दिया है. इसके साथ ही शासन और प्रशासन में डिजिटल और वर्चुअल माध्यमों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है. अंतरजनपदीय बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समिति बैठकों को हाइब्रिड मोड में आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का आह्वान किया है. इसमें मेट्रो, बस, ई-रिक्शा, कारपूलिंग और साइकिल जैसे विकल्प शामिल हैं. उन्होंने कहा कि जब मंत्री और अधिकारी स्वयं उदाहरण पेश करेंगे, तभी जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा. मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि मंत्रीगण अपनी वाहन फ्लीट को 50 प्रतिशत तक कम करें, जिससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और ईंधन की खपत घटे. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि अगले छह महीने तक प्रदेश सरकार के सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर विदेश यात्राओं से परहेज करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन और ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व भी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल की खपत को न्यूनतम रखना समय की मांग है. इसी दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार भी अपने स्तर पर बड़े कदम उठा रही है. बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा. सरकारी भवनों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों, विद्यालयों और महाविद्यालयों तक सौर ऊर्जा को लोकप्रिय बनाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई नीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके और स्वच्छ परिवहन प्रणाली को बढ़ावा मिले.

मुख्यमंत्री ने सामाजिक आयोजनों में भी मितव्ययिता अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि शादी-विवाह और अन्य समारोहों में घरेलू स्थलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इससे न केवल अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा. सरकार ने एक बार फिर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती देने की बात कही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रीगण उपहार स्वरूप केवल उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जो उत्तर प्रदेश में निर्मित हों. मुख्यमंत्री ने एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए नीतिगत बदलाव तेजी से लागू किए जाएं. कॉमर्शियल उपयोगकर्ताओं को भी पीएनजी से जोड़ने पर जोर दिया गया है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. बैठक में तिलहन उत्पादन, प्राकृतिक खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई. मुख्यमंत्री ने खाद्य तेल की खपत कम करने और जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. इसके साथ ही वर्षा जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने का आह्वान किया गया. उन्होंने सोने के अनावश्यक आयात को भी हतोत्साहित करने की बात कही, ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके.

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