राम मंदिर चढ़ावा चोरी; चंपत राय और अनिल मिश्रा बने सरकारी गवाह

Fourth Pillar Live

यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश में अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है. चार्जशीट में इस मामले को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं. पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को क्लीन चिट दी है. दोनों को पुलिस ने इस मामले में गवाह बनाया है. चार्जशीट में बताया गया है कि चढ़ावे के पैसों की चोरी कैसे पकड़ी गई. इसमें चोरी की घटना से लेकर पुलिस कार्रवाई तक का पूरा घटनाक्रम दर्ज है. पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 3 जून को सबसे पहले अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा को चोरी करते पकड़ा गया था. उस दिन गणनाकर्मी मदन गोपाल निगम ने इन लोगों को नोटों की गड्डी छिपाते हुए देखा था. इसके अगले दिन 4 जून को भी चोरी की घटना सामने आई. अविनाश शुक्ला को चोरी करते हुए गणना कर्मी संत प्रसाद वर्मा ने देख लिया. इसके बाद मदन गोपाल निगम और संत प्रसाद वर्मा की शिकायत पर गेट पर चेकिंग शुरू की गई. चेकिंग के दौरान अविनाश शुक्ला ने चोरी किए गए 2 लाख 25 हजार रुपये बाथरूम में छिपा दिए थे. तलाशी के दौरान यह रकम बरामद कर ली गई. पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून की रात दिल्ली से ट्रेन के जरिए अयोध्या आ रहे चंपत राय को चोरी की जानकारी दी गई थी. उन्हें चोरी से जुड़े वीडियो भी भेजे गए थे. 5 जून को अयोध्या पहुंचने के बाद चंपत राय ने कारसेवकपुरम स्थित आवास पर अनिल मिश्रा और गोपाल राव के साथ बैठक की. इस बैठक में लैपटॉप पर चढ़ावा चोरी से जुड़े कई सीसीटीवी फुटेज दिखाए गए थे.

पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि चंपत राय ने ये सीसीटीवी फुटेज देखे थे. इसके बावजूद उन्होंने 7 जून को एक बयान जारी किया था. चार्जशीट में चंपत राय के 7 जून के बयान का भी जिक्र है. इसमें उन्होंने कहा था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है. इस काम में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. उन्होंने कहा था कि ऑडिट का काम कई दिनों तक चलता है और उस समय भी यह प्रक्रिया चल रही थी. उनके बयान के मुताबिक, तब तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई थी. चार्जशीट के मुताबिक, 3 जून को पहली बार चोरी पकड़ी गई थी. 4 जून को चंपत राय को इसकी जानकारी हो गई थी. 5 जून को उन्हें चोरी के सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए गए थे. इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया. एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दी. इसके बाद 25 जून 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में एफआईआर दर्ज कराई गई. यह एफआईआर कृष्ण मोहन की तरफ से दर्ज कराई गई थी. पुलिस की चार्जशीट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया गया है. दोनों को मामले में गवाह बनाया गया है. पुलिस ने जांच में FIR दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन को अपना पहला गवाह बनाया है. पुलिस की चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का जिक्र है. इनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के अलावा कोतवाली के इंस्पेक्टर, राम जन्मभूमि थाने के इंस्पेक्टर, सीओ अयोध्या समेत 27 पुलिसकर्मी भी गवाह बनाए गए हैं. जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में अविनाश शुक्ला सबसे ज्यादा बार चोरी करते दिखाई दिया. वह 85 बार चढ़ावा चोरी करता मिला और 4 बार चोरी में मदद करता दिखाई पड़ा. वहीं करुणेश पांडे ने खुद 2 बार चोरी की. वह 68 बार चोरी में मदद करता दिखाई दिया. वहीं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव ने 15 अप्रैल 2026 से 3 जून 2026 के बीच 16 बार खुद चोरी की और 19 बार चोरी में मदद की. यानी करीब 50 दिन की नौकरी में वह 35 बार चोरी करने या चोरी में मदद करने में शामिल रहा.

लव कुश मिश्रा ने एक बार खुद चोरी की और 52 बार चोरी में मदद की. अनुकल्प मिश्रा 56 बार चोरी में मदद करता दिखाई दिया. रमाशंकर मिश्रा ने एक बार चोरी की. चार्जशीट के मुताबिक, रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव भी चढ़ावा चोरी में शामिल था. उसने 25 मई और 30 मई को अविनाश शुक्ला की चोरी में मदद की थी. सुभाष श्रीवास्तव के कहने पर चढ़ावा चोरी करने वाले आरोपियों की सिक्योरिटी गार्ड आते-जाते समय चेकिंग नहीं करते थे. ज्यादा रकम चोरी करने के लालच में आरोपियों ने सुभाष श्रीवास्तव को अपने साथ मिला लिया था. वहीं मनीष यादव को अप्रैल 2026 में नौकरी लगवाने के बाद सभी आरोपी मिलकर बड़ी रकम चोरी करने लगे थे. सुभाष श्रीवास्तव 7 जनवरी 2022 को रिटायर हुआ था. उसे दानपात्र से मिलने वाले चढ़ावे को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों के पास से कुल 79 लाख 85 हजार 493 रुपये बरामद किए गए हैं. वहीं केस के सभी आठ आरोपियों के बैंक खातों में कुल 98 लाख 30 हजार रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है. पुलिस की चार्जशीट में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है. तीनों को मामले में गवाह बनाया गया है. वहीं गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर जांच पूरी कर ली गई है. राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच और चार्जशीट दाखिल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि सभी आरोपों की SIT ने जांच की है. जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में पाया गया कि चढ़ावे की गिनती के लिए रखे गए कुछ लोगों ने अपराध किया था. उन्होंने कहा कि भगवान राम के लिए सौंपी गई कीमती वस्तुएं सुरक्षित हैं. जांच में ट्रस्ट और ट्रस्टियों की कोई गलती या अपराध नहीं पाया गया. आलोक कुमार ने कहा कि इस जांच के बाद कई विवाद खत्म हो गए हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब इस मामले में राजनीति नहीं होगी और राम मंदिर के मुद्दे का इस्तेमाल 2027 के चुनाव की तैयारी के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने अपील की कि मामले की रोज सुनवाई हो, ताकि मंदिर परिसर में गलत काम करने वालों को सजा मिल सके.

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