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यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में मथुरा के यमुना एक्सप्रेसवे पर 16 दिसंबर को हुए भयावह सड़क हादसे के बाद अब तक अधिकतर मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है. डीएनए जांच अब निर्णायक मोड़ बन चुकी है. यह हादसा घने कोहरे के बीच आठ बसों और अन्य वाहनों के आपस में टकराने तथा आग लगने से हुआ था, जिसमें दर्जनों यात्रियों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हुए. हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर लाए गए शव बुरी तरह भस्म हो चुके हाल में थे जिसकी वजह से देखकर तो पहचान लगभग असंभव हो गई. इतने कष्टदायी मंजर में, पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों ने शवों से डीएनए नमूने लिए हैं, ताकि परिवार अपने अपनों को पहचान सकें और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ सके. विधि विज्ञान प्रयोगशाला, आगरा में चल रही डीएनए जांच की अगुवाई इंचार्ज डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार कर रहे हैं. उनके अनुसार मथुरा की घटना एक बहुत ही सेंसिटिव घटना हुई है. इसके लिए 15 अज्ञात शवों की बॉडी के पोस्टमार्टम किए गए. बॉडी के पार्ट्स कंकाल वगैराह, दांत वगैराह हमारे पास परीक्षण हेतु प्राप्त हुए हैं जिनकी शिनाख्त की जानी है.
मानवीय संवेदनाएं भी जुड़ी हुई हैं. इसके लिए मैंने अपने मुख्यालय से अन्य वैज्ञानिकों को भी गाजियाबाद प्रयोगशाला से लखनऊ प्रयोगशाला से सबने मिलकर कार्य किया है. अशोक कुमार का मानना है कि वह बहुत जल्दी ही नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. अशोक कुमार का कहना है कि इसमें हम काफी शवों की शिनाख्त कर लेंगे. मिली जानकारी के मुताबिक हादसे में लगने वाली भीषण आग के कारण हड्डियां और दांत कोयले की तरह टूट रहे हैं, जिससे डीएनए निकालना भी बेहद जटिल हो गया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर बोन मैरो या दांतों के पल्प से उपयोगी डीएनए प्राप्त होता है तभी नामों की पुष्टि सम्भव हो सकेगी. आगरा के वैज्ञानिक अधिकारी शशि शेखर पांडेय, पवन कुमार, और अन्य टीम सदस्य इस चुनौतीपूर्ण जांच में दिन-रात जुटे हैं. इसके अलावा, लखनऊ और गाजियाबाद से विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम को भी जांच में सहायता के लिए बुलाया गया है. पुलिस के अनुसार अब तक करीब 15 डीएनए सैंपल परिवारों से लिए जा चुके हैं, लेकिन परिणाम और पुष्टि अभी बाकी है. मृतकों के परिजन विधि विज्ञान प्रयोगशाला के चक्कर काटते हुए इमोश्नल हैं और सभी चाहते हैं कि उनके अपनों के अवशेष की पहचान जल्द से जल्द हो जाए.