संभल के जज विभांशु सुधीर का 12 साल के करियर में 8वां ट्रांसफर बना चर्चा का विषय

Fourth Pillar Live

यूपी डेस्क: संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले ने नौकरशाही और सियासत के साथ साथ न्यायपालिका में भी हलचल मचा रखा है. संभल हिंसा मामले में पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश देने वाले जज विभांशु सुधीर का अचानक तबादला क्यों चर्चा का विषय बन गया है. क्या आदेश देना उन्हें भारी पड़ गया? जज के तबादले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और व्यवस्था पर कई तीखे सवाल खड़े किए हैं तो चंदौली में वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन कर तबादले का विरोध किया. संभल के चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर इन दिनों प्रदेश की सबसे ज्यादा चर्चित शख्सियत बन गए हैं. चर्चा की वजह है उनका अचानक हुआ तबादला है. हाल ही में उन्होंने संभल हिंसा मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन CO अनुज चौधरी सहित करीब दो दर्जन पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे. यह पहला मौका नहीं था जब उन्होंने पुलिस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हो. इससे पहले 24 दिसंबर को भी उन्होंने एक 3 साल पुरानी मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए 13 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था.

विभांशु सुधीर के इन फैसलों से प्रशासनिक मशीनरी में हड़कंप मच गया था. बीती रात करीब दर्जन भर जजों की तबादला सूची में उनका नाम भी शामिल था और उन्हें सुल्तानपुर भेज दिया गया. खास बात यह है कि उन्हें सीजेएम के पद से हटाकर एक पद नीचे भेजा गया है. 12 साल के करियर में यह उनका 8वां तबादला है. अगर प्रमोशन को भी जोड़ लें तो उनके करियर में 12 साल की नौकरी 15वां बदलाव है. विभांशु सुधीर के तबादले पर अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर बिना नाम लिए सरकार को घेरा. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘सत्य स्थानांतरित नहीं होता, उसका स्थान अचल है. न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन सीधे-सीधे लोकतंत्र का हनन है.’ अखिलेश यादव के इस बयान को सीधे तौर पर जज के तबादले से जोड़कर देखा जा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने पुलिस प्रशासन के दबाव में आकर यह कदम उठाया है. सपा प्रमुख ने स्वतंत्र न्यायपालिका को संविधान की रक्षा के लिए अनिवार्य बताया और इसे एक बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया है.

वहीं दूसरी ओर उनका तबादला होने के बाद बुधवार को चंदौसी कचहरी के वकीलों ने तबादले के विरोध में विरोध प्रदर्शन किया. वकीलों ने कोर्ट परिसर के अंदर रहकर ही संभल प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विभांशु सुधीर का तबादला रोकने की मांग भी की. जहां वकीलों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान CJM के समर्थन में जो अधिकारी न्याई है वो हमारा भाई है… जैसे नारे भी लगाए. वकीलों ने कहा कि सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है लेकिन वह काफी अच्छा कार्य कर रहे थे और पूरा ही जिला उनकी न्याय प्रणाली से खुश था. उनके द्वारा पुलिस वालों पर मुकदमा दर्ज करने का जो आदेश दिया गया था उससे सभी वादकारियों में खुशी की लहर थी. लेकिन आज उनके तबादले को लेकर अधिवक्ताओं में काफी ज्यादा आक्रोश है क्योंकि एक इतने अच्छे न्यायिक अधिकारी का इतनी जल्दी तबादला कर दिया गया है. पुलिस के दबाव में यह तबादला किया गया है इसलिए अधिवक्ताओं में रोष है. विरोध प्रदर्शन करने वाले वकील ने कहा कि अनुज चौधरी पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश करने वाले CJM का शासन और प्रशासन की मिली भगत से तबादला कर दिया गया. इसलिए किसी भी अच्छे अधिकारी को सजा देने का अधिकार किसी को नहीं है. सपा के द्वारा अदालत के आदेश को गलत बताना यह भी बिल्कुल गलत है और मेरी हाईकोर्ट से मांग है कि वह इस बयान को लेकर कंटेंप्ट करें. प्रशासन के दबाव में जुडिशरी का ट्रांसफर दिखाया जाना बिल्कुल गलत है.

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