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यूपी डेस्क : वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है. इस अभियान के तहत परियोजना की जद में आने वाली छह मस्जिदों में से 5 की रजिस्ट्री लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के नाम पूरी हो चुकी है. ऐसे में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मस्जिद प्रबंधन और उनसे जुड़े लोग स्वयं संबंधित ढांचों को हटाने का काम कर रहे हैं, जिससे आगे की कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके. प्रशासन के अनुसार दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और लोगों को जाम की समस्या से राहत दिलाना है. इसी क्रम में पहले अधिग्रहित किए गए 52 भवनों पर भी तोड़फोड़ का अभियान जारी है. मौके पर पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें तैनात हैं, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी मौजूद है. अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रभावित संपत्तियों के अधिग्रहण और रजिस्ट्री की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही है. प्रशासन का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य निर्धारित योजना के अनुसार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है और परियोजना पूरी होने के बाद दालमंडी क्षेत्र में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम होगा.
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग के तौर पर मुस्लिम बहुल दालमंडी के चौड़ीकरण को करके 60 फीट के चौड़े सड़क को 650 फीट तक बनाने का लक्ष्य था. हालांकि अब यह लक्ष्य पूरा होता दिखाई पड़ रहा है. चौड़ीकरण की जद में कुल 6 मस्जिदों को 187 भवन शामिल थे. जिसमें से लगभग डेढ़ सौ भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है. परियोजना के बीच में रोड़ा बनने वाली पांच मस्जिदों पर सहमति बन गई है और पीडब्ल्यूडी ने रजिस्ट्री करा लिया है. दालमंडी के अंतिम छोर पर मौजूद बची हुई अंतिम मस्जिद लंगड़ा हाफिज को लेकर मस्जिद कमेटी ने भी अच्छे संकेत दिए हैं. अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी सैयद मोहम्मद यासीन ने खास बातचीत में बताया कि हम कभी भी दालमंडी चौड़ीकरण के विरोधी नहीं है. लेकिन हम चाह रहे थे कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था निकल आए. जिससे मस्जिद भी बच जाए.