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यूपी डेस्क : राम मंदिर में कथित हेराफेरी की जांच के बाद अब अयोध्या पुलिस कानूनी औपचारिकताओं पर फोकस कर रही है. पुलिस टीम जेल में बंद आरोपियों में एक से लगातार पूछताछ की जा रही है और सभी आठ आरोपियों की कस्टडी पाने के लिए कागजी कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की टीम किसी भी वक्त अयोध्या पहुंच सकती है. सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने स्थानीय अदालत से विशेष अनुमति प्राप्त करने के बाद 26 जून को गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से एक, अविनाश शुक्ला से जिला जेल के अंदर ही गहन पूछताछ की. ये पूरी कानूनी कवायद अदालत से पुलिस रिमांड मांगने से पहले कलेक्ट किए गए सबूतों की पुष्टि करने और नए सुराग हासिल करने के उद्देश्य से की जा रही है. फिलहाल सभी आठों आरोपी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं. सूत्रों के मुताबिक, जेल के अंदर हुई पूछताछ के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला से भक्तों के दान के पैसों को दूसरे खातों में भेजने, नकदी की आवाजाही और इस साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर तीखे सवाल पूछे गए. ये पूछताछ इसलिए भी बेहद अहम है, क्योंकि FIR दर्ज होने से कई हफ्ते पहले, 5 जून को ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अविनाश के पास से 20 लाख रुपये बरामद किए थे.
हालांकि, आरोपियों से बरामद रकम का कोई आधिकारिक ब्योरा नहीं है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सबसे बड़ी राशि अविनाश के पास ही बरामद की गई थी. इसी बीच जांचकर्ता अधिकारियों ने दिनभर अदालत में पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल करने के लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं. पुलिस का मानना है कि इस पूरे घोटाले के काम करने के तरीके (मोडस ऑपेरंडी) को समझने, वित्तीय लेन-देन के पूरे रास्ते का पता लगाने और आरोपियों को दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के सामने बैठाकर पूछताछ करने के लिए उन्हें हिरासत में लेना बहुत जरूरी है. पुलिस टीमें अब ये जांच कर रही हैं कि क्या बरामद रकम उसके द्वारा कथित तौर पर हड़पी गई पूरी रकम थी या अभी-भी कुछ और पैसा है, जिसका हिसाब-किताब नहीं मिला है. इससे पहले सोमवार को ही एसआईटी ने गिरफ्तार किए गए सभी आठों आरोपियों के बैंक और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की स्क्रूटनी यानी जांच को काफी तेज कर दिया था. अब एसआईटी की टीम जल्द ही अयोध्या पहुंचकर अब तक एकत्र किए गए तमाम सबूतों की समीक्षा करेगी. इसके बाद इस पूरे गबन मामले का वित्तीय, फोरेंसिक और डिजिटल विश्लेषण करने के साथ-साथ आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिससे इस पूरे मामले की जांच की रफ्तार और ज्यादा बढ़ जाएगी.